Helpline No.: 011-23343782
Monday to Friday (3 - 4 PM)

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था आयोग अधिनियम 2004 (2005 का 2), एन.सी.एम.ई.आई द्वारा यथा संशोधित (संशोधन अधिनियम 2006) के अनुसार अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं के अधिकार निम्नलिखित हैं: 

अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था की स्थापना करने का अधिकार      

  1. कोई भी व्यक्ति जो अल्पसंख्यक संस्थान की स्थापना करना चाहता है तो वह उपर्युक्त प्रयोजन हेतु अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रदान करने हेतु सक्षम प्राधिकारी को आवेदन कर सकता है। 
     
  2. सक्षम प्राधिकारी : 
     
  • दस्तावेजों, शपथपत्रों अथवा अन्य साक्ष्य का अवलोकन करने पर यदि कोई हो, तो और 
     
  • आवदेक को सुनवाई का अवसर देने के बाद उप-धारा(1) के अधीन फाइल किए गए प्रत्येक आवेदन पर यथासंभव शीघ्रता से प्रमाणपत्र प्रदान करने अथवा आवेदन को अस्वीकार करने का निर्णय ले सकता है, जैसा भी मामला हो, 
     

बशर्ते जहां आवेदन अस्वीकार कर दिया जाता है वहां सक्षम प्राधिकारी इस संबंध में आवेदक को सूचित करेगा।

  1. जहां अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रदान करने हेतु उप धारा (1) के तहत आवदेन की प्राप्ति से नब्बे दिनों की अवधि के भीतर :
     
    • सक्षम प्राधिकारी ऐसा प्रमाणपत्र प्रदान नहीं करता है; अथवा 
       
    • जहां आवेदन अस्वीकार कर दिया जाता है और इस संबंध में उस व्यक्ति को सूचित नहीं किया जाता है जिसने ऐसे प्रमाणपत्र को प्रदान करने हेतु आवेदन किया है; 
       

तो यह समझ लिया जाएगा कि सक्षम प्राधिकारी ने आवेदक को अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रदान कर दिया है। 

अल्पसंख्यक दर्जा प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद संस्थाओं को संविधान के अनुच्छे्द 30(1) तथा एन.सी.एम.ई.आई अधिनियम की धारा 2(जी) के अनुसार निम्नलिखित अधिकार प्राप्त होते हैं : 

  1. इसके शासी निकाय का चयन करना जिस पर संस्था के संस्थापकों का संस्था के कार्यकलापों का संचालन और प्रबंधन करने के लिए निष्ठा एवं विश्वास हो।
     
  2. शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी नियुक्त करना।
     
  3. अपने समुदाय के विद्यार्थियों का प्रवेश देना। गैर-अल्पसंख्यक विद्यार्थी को इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। राज्य द्वारा न तो प्रवेश में आरक्षण नीति लागू की जा सकती है और न ही राज्य द्वारा किसी प्रकार का कोटा अथवा प्रवेश का प्रतिशत अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था में निर्धारित किया जा सकता है। लेकिन यदि संस्था राज्य से वित्तीय सहायता प्राप्त करती है तो संविधान के अनुच्छेद 29 का उप-अनुच्छेद (2) प्रबंधन को एक सीमा तक गैर-अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को प्रवेश देने हेतु बाध्य करता है।
     
  4. अपनी खुद की एक उचित फीस संरचना तैयार करना।
     
  5. अपने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना।
     

पी.ए. ईनामदार बनाम महाराष्ट्रा सरकार [2006(6) एस.एस.सी. 537] के मामले में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया है कि :

  1. प्रवेश में आरक्षण नीति अल्पसंख्यक संस्था पर लागू नहीं की जा सकती है। 
     
  2. रोजगार में आरक्षण नीति अल्पसंख्यक संस्था पर लागू नहीं की जा सकती है। 
     

आगे, संविधान के अनुच्छेद 30(1) के अधीन मदरसा सहित किसी भी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था को बच्चों के लिए फीस तथा अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम के दायरे से मुक्त रखा गया है।


आगंतुक संख्या : 178058