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एक अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था को विशेष अवधि के लिए समय-समय पर नए सिरे से अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान नहीं जा सकता है 

मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा टी.के.वी.टी.एस.एस. मेडिकल एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट बनाम तमिलनाडु राज्य (ए.आई.आर.2002 मद्रास 42) मामले में कहा गया कि एक अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था को विशेष अवधि के लिए एक ड्राइविंग लाइसेंस की तरह समय समय पर नए सिरे से अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान नहीं किया जा सकता है। राज्य सरकार एक अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्था को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान करने के बाद इस पर पुनर्विचार नहीं कर सकती है जब तक यह न मालूम हो कि अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान करने का आदेश जारी करते समय संबंधित संस्था ने किसी भी प्रकार के वास्तविक तथ्य को छिपाया है अथवा 11 परिस्थितियों में कोई मौलिक परिवर्तन हुआ है जो दिए गए आदेश के निरस्तीकरण को इंगित करता हो।

इस संबंध में माननीय मद्रास उच्च न्यायालय के निम्नलिखित टिप्पणियों का संदर्भ लिया जा सकता है: “...................... अंत में, हम मानते हैं कि किसी भी संस्था को जो एक बार भारत के संविधान के अनुच्छेद 30(1) के अंतर्गत परिकल्पित अधिकारों के तहत अल्पसंख्यक संस्था के रूप में घोषित किया गया हो, जो कि एक मौलिक अधिकार है, जब तक कि परिस्थितियों अथवा तथ्यों को छिपाने हेतु मौलिक परिवर्तन न किए गए हों, तब तक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप एक निष्पक्ष सुनवाई किए बिना सरकार को मात्र एक साधारण पत्र द्वारा उसे संवैधानिक लाभ से वंचित करने का कोई अधिकार नहीं है।